हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत “मुस्तदरकुल वसाइल” किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امام زمان عجلاللهتعالیفرجهالشریف:
یَا ابْنَ الْمَهْزِیَارِ! لَوْلَا اسْتِغْفَارُ بَعْضِکُمْ لِبَعْضٍ، لَهَلَکَ مَنْ عَلَیْهَا، إِلَّا خَوَاصَّ الشِّیعَةِ الَّتِی تَشْبَهُ أَقْوَالُهُمْ أَفْعَالَهُمْ.
इमाम-ए-जमाना (अ) ने फ़रमाया:
“ऐ इब्ने महज़यार! अगर तुममें से कुछ लोग एक-दूसरे के लिए मग़फ़ेरत की दुआ न करते, तो धरती पर रहने वाले सभी लोग हलाक हो जाते, सिवाय उन खास शियो के, जिनकी बातें उनके कर्मों के अनुरूप होती हैं।”
मुस्तदरकुल वसाइल, भाग 5, पेज 247, हदीस 5795
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